मंदिर तो आपने कई देखे होंगे और मंदिरों के चमत्कार भी आपने देखे होंगे क्या कभी आपने ऐसे मंदिर के दर्शन किए है जहां शराब का प्रसाद चढ़ता है। और वहां विराजमान देवता की शक्ति बहुत ही विशाल हो तो आज आपको ऐसे ही मंदिर के बारे में बताते है।दिल्ली के प्रगति मैदान मैं स्थित भैरो बाबा मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है।


मान्यता है कि यह पांडवों के समय का मंदिर है यहां पर शनिवार और रविवार भक्तों की लंबी लंबी कतारें देखने को भी मिलती है और यहां प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाई जाती है हिंदू मान्यता के अनुसार मंदिर का इतिहास बहुत ही दिलचस्प है माना जाता है कि बाबा भैरों को शराब का प्रसाद चढ़ाने से मन की मुरादे पूरी होती है और बाबा भैरों प्रसन्न होते हैं बाबा भैरों का यह मंदिर पांडवकालीन है। मंदिर का इतिहास पांडवों से जुड़ा हुआ है आपको बता दें इस मंदिर के दर्शन के लिए कई राज्यों के साधु संत समेत तमाम भक्त यहां दर्शन करने के लिए आते हैं चलिए जानते हैं इस मंदिर का इतिहास


चढ़ाया जाता है शराब का प्रसाद
दिल्ली के इस मंदिर में बाबा भैरों को शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है कहा जाता है बाबा भैरो को मदिरा बहुत पसंद थी इसलिए यहां हर तरीके की शराब चढ़ाई जाती है और यहां शराब खुले तौर पर प्रसाद के रूप में बाटी भी जाती है। शनिवार और रविवार को यहां कतारों में लोग खड़े होते है और कई बोतले शराब की चढ़ाई जाती है।

जरूर करें बाबा भैरो के दर्शन 
अगर आप भी कष्टों से घिरे हुए है और खुद को कष्टमुक्त करना चाहते है तो बाबा भैरों के दर्शन जरूर करके आए भक्तो की मानें तो बाबा भरो भक्तो की सभी मुरादे पूरी करते है। तभी यहां रविवार को भारी भीड़ नजर आती है कई राज्यो के लोग दूर दूर से यहां दर्शन करके आते है। बाबा भैरों को मान्यता बहुत अधिक है। आपको भी अपने कष्टों के निवारण के लिए बाबा भैरो के दर पर जरूर जाना चाहिए।


बाबा किलकारी के नाम से भी मशहूर है बाबा भैरों
माना जाता है कि, बाबा भैरों ने पांडवकाल में भूत पिशाच और राक्षसों को सिर्फ अपनी चीख से ही भस्म कर दिया था इसलिए भैरों बाबा को बाबा किलकारी के नाम से भी जाना जाता है भक्त यहां बाबा किलकारी के नाम से जयकारा भी लगाते है। 


कैसे पहुंचे मंदिर
अगर आप दिल्ली के निवासी है और मेट्रो से जाना चाहते है तो यह मंदिर दिल्ली के प्रगति मैदान (सुप्रीम कोर्ट) मेट्रो स्टेशन के पास है। यदि आप दूसरे राज्य से दिल्ली जाकर दर्शन करना चाहते है तो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से ही आपको ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं उपलब्ध हो जाएंगी आप साफ मन से आए और बाबा भैरो के दर्शन करके जाएं।


मंदिर का इतिहास
मंदिर के इतिहास की बात करें तो सबसे पहले हमें बहुत पीछे जाना पड़ेगा बात करते हैं अब पांडवकाल की पांडवों की नगरी इंद्रप्रस्थ को आज दिल्ली के नाम से जाना जाता है प्राचीन काल में दिल्ली को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था माना जाता है कि पांडवों द्वारा एक यज्ञ के आयोजन में भूत पिशाच और राक्षस विघ्न डाल रहे थे।


 जिससे पांडवों का यज्ञ ना हो सका बुरी शक्तियों ने दो से तीन बार लगातार पांडवों के यज्ञ में विघ्न डाला जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर को यह परामर्श दिया कि काशी से भैरो बाबा को बुलवाया जाए जिससे कि भैरों बाबा की कृपा से यज्ञ पूरा हो सके काशी से भैरों बाबा को लाने का बेड़ा मंझले भैया भीम ने उठाया और भैरव बाबा को काशी से लेने के लिए रवाना हो गए।  वहां जाकर मंझले भैया भीम ने बाबा भैरों से प्रार्थना की कि वह उनके साथ हस्तिनापुर चलें इसके बाद बाबा भैरों भीम के साथ चलने के लिए तैयार हो गए। और उन्होंने केवल अपनी एक चिल्लाहट से ही सभी राक्षसों को भस्म कर रख दिया और उन्होंने पांडवों के यज्ञ को संपन्न कराया माना जाता है तभी से यह मंदिर यहां पर स्थापित है।