क्यों पितृदोष से पीड़ित कुंडली मानी जाती है शापित कुंडली, जानें लक्षण व उपाय

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में मृत्यु और पुर्नजन्म से जुड़े तथ्यों का बहुत महत्त्व है जो हमारे जीवन पर बेहद गहरा असर डालते हैं, इन्हीं धारणाओं से जुड़ा कुंडली का सबसे खतरनाक और बड़ा दोष है ‘पितृ दोष’|
पितृ दोष को पितृ ऋण भी कहा जाता है| पितृ दोष से पीड़ित कुंडली शापित कुंडली मानी जाती है क्योंकि जब तक इस दोष का निवारण न किया जाए यह दोष खत्म नहीं होता और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में अपने आप आ जाता है|

क्या है पितृ दोष :-

ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में पितृ दोष को लेकर अलग-अलग धारणाएं मौजूद है लेकिन यह तय हो चुका है कि पितृ दोष हमारे जीवन में पूर्वजों और परिवार के लोगों से जुड़ा दोष होता है| मान्यता अनुसार अगर हमारे परिवार के किसी पूर्वज का मृत्यु के बाद सही ढंग से अंतिम संस्कार न किया गया हो या जीवित अवस्था में ही उनकी कोई इच्छा अधूरी रह जाती है, तो उनकी आत्मा घर के लोगों और आगे आने वाली पीढ़ी के लोगों के बीच भटक कर परिवार के लोगों को कष्ट देकर अपनी इच्छा पूरी करने के लिए उनपर अपना दबाव डालती है, इस प्रकार के कष्ट पितृदोष के रूप में जातक की कुंडली में दिखाई देते हैं| संक्षिप्त में कहा जाए तो पूर्वजों के द्वारा वंशजों को दिया जाने वाला कष्ट ही पितृ दोष है|

पितृ दोष के कारण :-

पितृ दोष के कई कारण हो सकते हैं, ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक यदि जन्म पत्री में सूर्य पर शनि अथवा राहु-केतु की दृष्टि हो तो व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष पाया जाता है| कई ज्योतिष विद्वानों के अनुसार पितृ दोष के निम्न कारण हैं-

1) पूर्व जन्म में अगर माता-पिता की अवहेलना,
2) पूर्वजों का अपमान करना,
3) अपने दायित्वों का ठीक तरीके से पालन न करना
4) पीपल, वट इत्यादि पूजनीय वृक्ष कटवाना
5) अपने अधिकारों और शक्तियों का दुरुपयोग करना
6) कुल देवी-देवता आदि का अपमान करने आदि से कुंडली में पितृ दोष उत्पन्न होता है, जिस कारण व्यक्ति को जीवन में हर कदम पर असफलता मिलती है|

पितृ दोष के लक्षण :-

पितृ दोष से प्रभावित व्यक्ति में निम्न प्रकार के लक्षण पाए जाते हैं :-
1) संतान का नही होना, हो तो विकलांग या मंदबुद्धि आदि कारणों से हो कर मर जाना|
2) नौकरी ,व्यापार-व्यवसाय आदि में हानि अथवा बरकत का न होना|
3) परिवार में एकता न होना या हर समय अशांति का माहौल हो|
4) घर के लोगों का अस्वस्थ होना और इलाज करवाने पर भी ठीक न होना|
5) घर के युवक और यु‍वतियों का विवाह न होना या विवाह में अनावश्यक विलंब होना|
6) अपने परिवार वालों, सगे-संबधियों  प्रियजनों से धोखा मिलना|  
7) बार-बार दुर्घटनादि होना|
8) मांगलिक कार्यों में अत्यधिक विघ्न उत्पन्न होना|
9) परिवार के सदस्यों में किसी को प्रेत-बाधा जैसी समस्याएं होना|
10) घर में हमेशा तनाव, कलेश और लड़ाई-झगड़े का माहौल रहना|

पितृ दोष का निवारण :-

पितृ दोष का निवारण अति आवश्यक है क्योंकि यह दोष तब तक आपकी कुंडली से खत्म नहीं होता जब तक इसका उपाय न किया जाए और पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है, यानी अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है और वह उसका निवारण नहीं करता तो यह उसके पुत्र की कुंडली में स्वयं आ जाता है| निम्न उपायों द्वारा आप पितृ दोष से छुटकारा पा सकते हैं-

1) अमावस्या के दिन किसी निर्धन व्यक्ति को भोजन कराएं और साथ ही खीर जरूर खिलाएं|
2) पीपल का वृक्ष लगाकर उसकी अच्छी तरह से देखभाल करें|
3) ग्रहण के समय दान करना न भूलें|
4) श्रीमदभगवद्गीता का हर दिन सुबह उठकर पाठ करें|
5) अगर प्रभाव ज्यादा कष्टदायक न हो तो घर में श्रीमद्भागवद का पाठ कराएं|
6) अपने कर्मों को जहां तक हो सके शुद्ध रखने का प्रयास करें अर्थात अच्छे कर्म करें|